भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन से लेकर आजादी तक देश के अनेक लीडरों ने देश की सेवा की थी। उन्ही में से एक प्रमुख लीडर रहे चन्द्रभानु गुप्ता। अपने विनय स्वभाव और कुशल नेवृत्व के आधार पर उनकी पहचान बनी हुई है।

चन्द्रभानु गुप्ता का जीवन परिचय

चन्द्रभानु गुप्ताजी (Chandra Bhanu Gupta) का जन्म उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अलीगढ़ जनपद में 14 जुलाई 1902 को हुआ था। पिता एक ब्यापारी थे। साधारण एवं संस्कारवान परिवार था।

चन्द्रभानु गुप्ता की शिक्षा

उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा अलीगढ़ से ही प्राप्त की थी। और उच्च शिक्षा मेरठ और लखनऊ से प्राप्त की थी। उन पर महात्मा गांधी का प्रभाव अधिक पड़ा था। शिक्षा प्राप्त करने के साथ देश सेवा का कार्य भी करते रहे।

स्वतंत्रता संग्राम (Role in Freedom Movement)

गुप्ताजी ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ चढ़कर भाग लिया था। असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) और अंग्रेजों भारत छोडो आन्दोलन (Quit India Movement) में भाग लेने के कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उनका विश्वास था कि "सच्चा स्वराज तभी सम्भव है जब समाज का हर वर्ग शिक्षित और आत्मनिर्भर बने।"

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राजनैतिक जीवन (Political Ideology)

भारत स्वतन्त्र होने के बाद गुप्ता जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता बने। प्रदेश में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। तीन बार प्रदेश के मुख्य मंत्री बने। नगर निकाय से विधान मण्डल तक कार्य किए।

मुख्य मंत्री के रूप में (Chief Minister of Uttar Pradesh)

गुप्ता जी सन् 1954, 1960 और 1967 में उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री बने। अपने कार्य काल में विकास, प्रशासनिक  सुधार और अपनायी गई आर्थिक नीतियो के कारण वे जाने जाते हैं।

प्रमुख उपलब्धियां

* औद्योगिक विकास (Industrial Development) के अंतर्गत छोटे और मध्यम उद्योगों का विकास किया। कानपुर, लखनऊ और गाजियाबाद जैसे शहरों को उद्योगों का केन्द्र बनाया। 

*  शिक्षा और स्वास्थ्य (Education & Health Reforms) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में स्कूलों की स्थापना, छात्रवृत्ति योजना, स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता जैसी योजनाओं का क्रियान- वयन किया।

* कृषि सुधार (Agricultural Reforms) के अन्तर्गत भूमि सुधार और Cooperative फार्मिंग को बढ़ावा दिया। वे कहते थे कि_" किसान भारत की रीढ़ है। "

* लोक प्रशासन (Public Administration & Transparency) के अन्तर्गत उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कडे कदम उठाये।  प्रशासनिक अधिकारियों की जबाबदेही तय की।

* एक लेखक, विचारक और समाज सेवक के रूप में उनका भारतीय संस्कृत्ति से गहरा लगाव था। उन्होंने अनेक सामाजिक संस्थाओ की स्थापना की थी। वे कहते थे - "भारत का भविष्य गाँव और युवाओं के हाथ में है। अगर हम उन्हें शिक्षित और सक्षम बना दे  तो, देश को पीछे नही कर सकता।"

विचारधारा

वे सादगी, ईमानदारी और लोक- हित की प्रतिमूर्ति थे। उनके सिद्धांतो और विचारों के कारण विपक्षी दलों से भी उन्हें सम्मान मिलता था।

मृत्यु और विरासत

गुप्ता जी का 11 मार्च 1980 को निधन हो गया था। उनके सम्मान में लखनऊ में चन्द्र मान पार्क की स्थापना की गयी है।

निष्कर्ष

चन्द्रभानु गुप्ता एक सच्चे जन‌सेवक के रूप में जाने जाते थे। राजनीति को उन्होंने जनसेवा का माध्यम बनाया। उनका नाम integrity, Simple city और vision के रूप में लिया जाता है। गुप्ता जी ने सेवा को ही अपना धर्म बनाया।