UN में सुधार की मांग -भारत की स्थायी सदस्यता कब?

By :Netahub Published on : 05-Mar-2026
UN

द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका के बाद एक ऐसे संगठन कि आवश्यकता महसूस हुई, जिसकी कि सर्वमान्यता व्यापक हो और कमजोर राष्ट्रो पर दंबग राष्ट्रों की दादागीरी पर कुछ हद तक अंकुश लगाया जा सके। इस संगठन का उद्देश्य वैश्विक शांति, सुरक्षा और सहयोग सुनिश्चित करना था। सन् 1945 में स्थापित संयुक्त राष्ट्र संघ की संरचना आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी कि अपने स्थापना के समय थी। पिछले कई दशकों से यूएन में सुधार की मांग तेज हुई है। अब प्रश्न खड़ा होता है कि उभरते भारत को यू एन में परमानेन्ट सद‌स्यता मिलेगी यदि हाँ तो कब?

Present में यू एन की संरचना

यू एन सिक्योरिटी काउंसलिंग में कुल 15 member होते है 

Permanent members ( PS )

* यूनाइटेड स्टेट

* यूनाइटेड किंगडम

* रसिया 

* फ्रांस

* चाइना

ये पाँच देश वीटो पॉवर रखते हैं अर्थात किसी भी प्रस्ताव को कोई भी देश रोक सकता है। 

Non- Permanent members:

10 देश जिन्हें 2 वर्ष के लिए चुना जाता है। परन्तु यह ढांचा आज की वैश्विक शक्ति संरचना को पूरी तरह प्रतिबिम्बित नही करता है। जिसकी आलोचना होती है। 

भारत की दावेदारी मजबूत क्यों?

1. विश्व की बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। नियमित चुनाव, संवैधानिक स्थिरता, वैश्विक मंच पर लोकतांत्रिक प्रति -निधित्व बढ़ाने के लिये भारत की मौजूदगी महत्व पूर्ण है। 

2. जिम्मेदार परमाणु शक्ति

परमाणु हथियार संपन्न होने के बावजूद 

भारत 

* "No first use" जैसी नीति

* निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं का पालन          

इससे भारत की छवि जिम्मेदार वैश्विक शक्ति की बनी।

3. G4 समूह का समर्थन

भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील मिलकर G4 नेशन का समूह बनाते है | यें देश UNSC में expansion और परमानेंट मेंबरशिप की मांग कर रहे है | 

4. जनसंख्या और आर्थिक शक्ति

* भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था वाला देश है।

* विश्व की सबसे बड़ी या दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश भारत है।

इतनी बड़ी जनसंख्या और अर्थव्यवस्था वाला देश होते हुये स्थायी सदस्यता का अभाव विशेषज्ञों को असन्तुलन लगता है।

5. शांति मिशनों में योगदान

भारत दशकों से यू.एन पीसकीपिंग आपरेशन्स में सैनिक, संसाधन और प्रशिक्षण देने वाला देश रहा है। वैश्विक सुरक्षा को दर्शाने बाला देश भारत है।

भारत का समर्थन करने वाले देश

* यूनाइटेड स्टेट 

* फ्रांस 

* रसिया

* यूनाइटेड किंगडम

* जापान

* आस्ट्रेलिया

ये देश मानते हैं कि भारत की भागीदार UNSC अधिक प्रतिनिधि बनेगा।

बाधाएँ

1. चीन का विरोध

परमानेंट मैम्बर शिप में चीन का स्पष्ट स्पष्ट समर्थन नही होता। यह सबसे बड़ी बाधा मानी जाती है।

2. वीटो पावर का प्रश्न

नये स्थायी सदस्यों को वीटो पॉवर मिले या न मिले, इस पर सहमति नहीं बन पाई है। बीटो न मिलने पर सदस्यता का प्रभाव सीमित हो जाएगा।

3. वैश्विक सहमति का अभाव

यू एन चार्टर में बदलाव -

* PS की स्वीकृति

* 2/3 सदस्यों का समर्थन जरूरी है |

प्रक्रिया जटिल और राजनैतिक रूप से संवेदनशी है।

4. क्षेत्रीय स्पर्धा

पकिस्तान जैसे देश क्षेत्रीय असंतुलन की बात कहकर विरोध करते हैं। 

UN सुधार की वर्तमान स्थिति 

पिछले वर्षो में कई बार यू एन जनरल एसेम्बली में चर्चा और इन्टरगवर्मेन्टल Negotiations हुये, किन्तु विशेषज्ञ मानते है कि भू-राजनैतिक स्पर्धा के कारण सुधार प्रक्रिया धीमी है। 

भारत के प्रयास, कूटनीतिक रणनीति

बहुपक्षीय सहयोग 

* G4 नेशन्स

* ग्लोबल साउथ नेतृत्व

विकास सहयोग

* तकनीकी सहयोग

* अफ्रीकी देशों को सहायता 

वैश्विक मंचों पर सक्रियता

* इण्टरनेशनल सोलर एलायन्स

* कलाइमेट Negotiations 

* G-20 प्रेसीडेन्सी

भारत लगातार अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। 

भारत को स्थायी सदस्यता का सम्मावित परिदृश्य 

1. यदि PS और सदस्य देशों के बीच सहमति बनती है तो अगले दशक में संभावना बन सकती है।

2. वैश्विक शक्ति संतुलन में परिवर्तन भू राजनैतिक बदलाव UNSC सुधार को तेज कर सकते हैं।

3. आंशिक सुधार मॉडल के अन्तर्गत पहले नये स्थायी सदस्य बिना वीटों के जोड़े जा सकते हैं।

भारत के संदर्भ में स्थायी सदस्यता का महत्व

1- वैश्विक नीति निर्माण के अन्तर्गत भारत सीधे शांति सुरक्षा और प्रतिबंध जैसे निर्णयों को प्रभावित कर सकेगा।

2 - रणनीतिक प्रतिष्ठा के अंतर्गत स्थायी सदस्यता भारत की स्थिति को और मजबूत करेगी।

3- भारत विकासशील देशों की समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से उठा सकेगा।

आलोचना

कुछ विशेषज्ञों का मानना है-

* केवल नये सदस्यों को जोड़ना पर्याप्त सुधार नहीं है। 

* वीटो प्रणाली स्वयं ही असमान है।

* UNSC का विस्तार निर्णय प्रक्रिया को धीमा कर सकता है अतः कुछ लोग व्यापक ग्लोबल गवर्नेन्स सुधार की मांग करते हैं।

निष्कर्ष

UNSE में सुधार आज की विश्व राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा है। भारत की दावेदारी जनसंख्या,लोकतंत्र अर्थव्यवस्था और वैश्विक राजनीति के आधार पर मजबूत है परन्तु राजनैतिक सहमति का अभाव बाधा बना हुआ है। ये तो पता नही कि भारत को स्थायी सदस्या विद वीटो पावर कब मिलेगी लेकिन UNSE में उसकी भागेदारी की मांग उत्तरोत्तर मजबूत होगी।

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